Thursday, Jan 23, 2020
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Shared By :Raghukul Aryawart

जल ही जीवन हैं

जल पावन हैं, 
जल निर्मल हैं! 
जल पवित्र हैं, 
जल जीवन हैं! 
 
जल अंबर मैं भी हैं, 
जल पृथ्वी पर भी हैं! 
जल आकाश में भी हैं, 
जल पाताल में भी हैं! 
 
जल पशु को भी चाहिए, 
जल पक्षी को भी चाहिए! 
जल मनुष्य को भी चाहिए, 
जल हर-जंतू को चाहिए! 
 
जल पीने को भी चाहिए, 
जल पिलाने को भी चाहिए! 
सुबह उठते ही जल चाहिए, 
रात को सोने से पहले भी जल चाहिए! 
 
जल जीवन का आधार हैं, 
जल पर ही सारे जीवन का आधार हैं! 
जल से ही सब कार्य होतें, 
जल बिना सब सूना जीवन! 
 
जल बिना क्या दाना-पानी, 
जल बिना क्या आना-जानी! 
जल बिना ना इंसान हैं, 
जल बिना ना भगवान हैं! 
 
गंगा बन पवित्रता बहाता जल, 
यमुना बन लोगों की प्रेरणा बनती जल! 
समुद्र सा विशाल भी जल, 
नदियों सा पावन भी जल! 
 
जल बिना सुना संसार, 
जल बिना कैसा संसार! 
हर कार्य के लिए आवश्यक जल, 
हर बात में आ जाता जल! 
 
बारिशों में जल, 
खेतों को सींचता जल! 
नहरों में पाया हैं जल, 
झड़नों से बहता कल-कल! 
 
हाँ माना अनंत हैं जल, 
सबसे पावन गंगाजल! 
हरियाली का स्त्रौत हैं जल, 
जन जन निर्माण का अद्वितीय अंग हैं जल! 
 
हर कण-कण मैं व्याप्त हैं जल, 
मगर फिर भी हताश हैं जल! 
सबको निस्वार्थ भाव से तृप्त वो करता, 
फिर भी आज खतरे में हैं जल! 
 
एक किसान की खेती हैं जल, 
एक प्यासे के लिए अमृत हैं जल! 
हाँ सबसे पावन हैं जल, 
हाँ सचमुच जीवन हैं जल! 
 
©दिपशीखा अग्रवाल! 😍
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