मैं डॉ. अनुभा हूँ, और आज मैं हर की पौड़ी आई हूँ — लेकिन यहाँ की पवित्र मिट्टी के बजाय मैंने देखा कि उसमें प्लास्टिक भी मिला हुआ है… यहाँ तक कि पवित्र मिट्टी की जगह प्लास्टिक के पैकेट्स का इस्तेमाल किया जा रहा है!
यह केवल प्रदूषण नहीं है — यह हमारे आध्यात्मिक मूल्यों का सीधा अपमान है।
🧒 मेरे साथ मेरा बेटा मान (Maan) भी है, जिसने यह पहचानने में मेरी मदद की कि कहाँ-कहाँ प्लास्टिक जैसे पदार्थों का गलत उपयोग हो रहा था। हमने साथ मिलकर देखा कि कैसे चुपचाप प्लास्टिक हमारे धार्मिक कार्यों में घुसता जा रहा है।
📞 वीडियो में आप देखेंगे कि एक प्लास्टिक रैपर पर छपा मोबाइल नंबर कैसे हमारी जाँच का पहला सुराग बना।
🙏 मैं आप सबसे हाथ जोड़कर निवेदन करती हूँ — अपने पवित्र स्थानों को स्वच्छ और शुद्ध रखें।
आध्यात्मिकता केवल पूजा-पाठ से नहीं, बल्कि प्रकृति की रक्षा और जागरूकता से भी फलती-फूलती है।
आइए, हम विश्वास के नाम पर प्लास्टिक रावणों का निर्माण न करें।
आइए, एक जागरूक पीढ़ी को खड़ा करें।
